Thursday, December 11, 2025

तुम्हारी याद से हरगिज़ न बाज़ आएँगे

 तुम्हारी याद से हरगिज़ न बाज़ आएँगे

जहाँ ख़याल न जाए वहाँ भी जाएँगे ,

                     तुम्हारे साथ जो बीते हैं कुछ हसीं लम्हे ,

                     उन्हें लिबास-ए-ग़ज़ल दे के गुनगुनाएँगे ,

" तिरी निगाह के मौहूम से इशारे पर

फ़लक से चाँद सितारे भी तोड़ लाएँगे ,

हम अहल-ए-फ़न हैं कहेंगे जो दिल पे बीती है

चढ़ेंगे दार पे हम फिर भी मुस्कुराएँगे , 

                          ज़रा भी आँच जो आई कभी नशेमन पर

                          हमारे नाले गुलिस्ताँ को फूँक डालेंगे , 

हर एक गाम पे 'नाशाद' सोचते हैं हम

कभी तो पाएँगे मंज़िल कभी तो पाएँगे !!



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