तुम्हारी याद से हरगिज़ न बाज़ आएँगे
जहाँ ख़याल न जाए वहाँ भी जाएँगे ,
तुम्हारे साथ जो बीते हैं कुछ हसीं लम्हे ,
उन्हें लिबास-ए-ग़ज़ल दे के गुनगुनाएँगे ,
" तिरी निगाह के मौहूम से इशारे पर
फ़लक से चाँद सितारे भी तोड़ लाएँगे ,
हम अहल-ए-फ़न हैं कहेंगे जो दिल पे बीती है
चढ़ेंगे दार पे हम फिर भी मुस्कुराएँगे ,
ज़रा भी आँच जो आई कभी नशेमन पर
हमारे नाले गुलिस्ताँ को फूँक डालेंगे ,
हर एक गाम पे 'नाशाद' सोचते हैं हम
कभी तो पाएँगे मंज़िल कभी तो पाएँगे !!
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