- योगी की कहानी
शीर्षक: “वो आखिरी रात”
काली रात थी, और छोटे गाँव कालीपुरा में सब सो रहे थे। सब कुछ शांत था, सिवाय रोहित के, जो 22 साल का साहसी लड़का था और हमेशा छोटी-छोटी डरावनी जगहें देखने में मज़ा लेता था।
उस रात उसे गाँव में एक पुरानी, सुनसान हवेली के बारे में सुना—“छुपा महल”। गाँव वाले कहते थे कि इस हवेली में रात के बाद कोई नहीं जाता, क्योंकि पिछले मालिक, एक ज़मींदार, अचानक गायब हो गया था। उसके बाद, लोग कहते थे कि वहां अजीब साए और फुसफुसाहटें सुनाई देती हैं।
रोहित ने ठान लिया—
“आज ही अंदर जाऊँगा। अगर सच है, तो सबको दिखाऊँगा।”
बारिश रुकते ही वह हवेली के पास पहुँचा। दरवाजे जंग लगे थे, और जैसे ही उसने उन्हें खोला, क्रीक की आवाज़ पूरे महल में गूँज गई। हवेली के अंदर सड़ांध और गीली लकड़ी की गंध थी, और हर कोने में जाले लगे हुए थे।
रोहित ने टॉर्च ऑन की और धीरे-धीरे कदम बढ़ाए। अचानक उसे अचानक ठंडी हवा महसूस हुई, और पीछे का दरवाजा जोर से बंद हो गया। दिल धड़कने लगा, पर उसने खुद से कहा,
“कुछ नहीं है, बस डर की बात है।”
मुख्य हॉल में पहुँचते ही उसकी रक्त ठंडा कर देने वाली चीज़ देखने को मिली। दीवारों पर पुराने चित्र लगे थे, पर चेहरे खुरच दिए गए थे, जैसे कोई उन्हें नहीं देखना चाहता हो। फर्श पर राख का गोला बना हुआ था, और अजीब चिन्ह बने थे।
रोहित झुककर देखने लगा—
“कहीं ये काला जादू तो नहीं?”
तभी उसने धीमी फुसफुसाहट सुनी—
“रोहित… रोहित…”
रोहित थरथराया। उसकी टॉर्च झपकी। आवाज़ें तेज़ हो गईं—
“तुमने आना था… अब तुम हमारे साथ हो…”
रोहित ने चारों तरफ देखा, पर केवल दीवारों पर छायाएँ नाच रही थीं। उसने दरवाजा खोला, लेकिन वह बाहर से बंद था। उसका फ़ोन भी सिग्नल नहीं दे रहा था।
तभी हॉल के कोने से उसने देखा—एक लंबा, काला साया, बिना चेहरा, बस अंधेरा खालीपन। यह उसके पास बढ़ने लगा, और अचानक तापमान इतना गिर गया कि उसकी साँसें धुँध में बदल गईं।
रोहित भागा, पर हॉल अनंत लग रहा था, और नई गलियां वहां उभर रही थीं, जहां पहले कुछ नहीं था। उसने हँसी सुनी, हँसी जैसी कि सैंकड़ों बच्चे एक साथ हँस रहे हों।
आख़िरकार, वह सीढ़ियों तक पहुँचा, ऊपर भागने की उम्मीद में। पर जैसे ही उसने कदम रखा, सीढ़ियाँ गायब हो गईं, और वह अंधेरे में तैरता हुआ लग रहा था।
फिर एक गहरी, खाली आवाज़ उसके कान में फुसफुसाई—
“ये तुम्हारी गलती है… तुमने देख लिया…”
अचानक, एक ठंडी हाथ ने उसका कंधा पकड़ लिया। वह चिल्लाया, पर आवाज़ बाहर नहीं निकली। जब उसने आँखें खोली, तो वह बाहर हवेली के सामने खड़ा था, बारिश में भीगता हुआ।
लेकिन कुछ गलत था। गाँव ख़ाली और मरा हुआ लग रहा था। रोहित ने जैसे ही पानी में अपनी परछाई देखी, वह अपने आप का नहीं था—वह वो फ़ेसलेस साया था, जो हवेली में मिला था।
फुसफुसाहट गूँजी—
“अब हम तुम्हारे अंदर हैं…”
रोहित भागा, पर अब कोई सुनने वाला नहीं, कोई देखने वाला नहीं था। उस रात, कालीपुरा ने एक और आत्मा ले ली, और हवेली फिर शांत हो गई, अगले जिज्ञासु आगंतुक का इंतजार करती हुई।
"सोचो, अगर तुम उस रात उस हवेली में होते, क्या तुम वापस आ पाते?"

